UP New Labour Law 2026: मई से लागू होंगे नए श्रम कानून, सैलरी-PF-ग्रेच्युटी सब बदलेगा जानिए क्या होगा असर

Published on: April 30, 2026
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UP New Labour Law 2026: अगर आप उत्तर प्रदेश में किसी कंपनी में नौकरी करते हैं, या जोमैटो-स्विगी जैसे किसी डिलीवरी प्लेटफॉर्म के लिए काम करते हैं, तो मई 2026 का महीना आपके लिए बहुत जरूरी है। योगी आदित्यनाथ की सरकार मई से चार नए श्रम कानून लागू करने जा रही है। इनमें काम के घंटे, ओवरटाइम, सैलरी, PF, ग्रेच्युटी और बोनस  सब कुछ बदलने वाला है। हाल ही में नोएडा में कारखानों के श्रमिकों ने वेतन बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद से इन कानूनों को लागू करने की प्रक्रिया में तेजी आई है। नए नियमों का मसौदा पहले से तैयार है और लोगों से सुझाव व आपत्तियाँ माँगी जा चुकी हैं। उन्हीं के आधार पर मई में अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी। इस लेख में हम आपको जानकारी देने वकले हैं कि इन नए श्रम कानूनों से आम मजदूरों और कर्मचारियों की जिंदगी पर क्या और कैसे असर पड़ेगा।

29 पुराने कानून हटे 4 नई संहिताएँ आईं

यह बदलाव एक लंबी प्रक्रिया का नतीजा है। केंद्र सरकार ने देश के 29 पुराने और उलझे हुए श्रम कानूनों को खत्म करके उन्हें चार नई संहिताओं में समेट दिया है। ये हैं इनमें वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020। उत्तर प्रदेश अब इन्हें अपने राज्य में लागू करने की तैयारी में है। इन कानूनों में सबसे अहम बदलाव वेतन की परिभाषा में किया गया है। इसके अलावा अब मैनेजर और सुपरवाइजर स्तर के कर्मचारी भी कानूनी सुरक्षा के दायरे में आ जाएँगे। ठेके पर काम करने वाले मजदूरों की जिम्मेदारी भी सीधे मुख्य कंपनी पर होगी।

15 मिनट अतिरिक्त काम पर मिलेंगे दोगुना पैसे

  • नए नियमों के तहत किसी भी कंपनी में काम के घंटे अधिकतम 8 तय किए गए हैं। योगी सरकार इन श्रम कानूनों को पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाने की कोशिश कर रही है।
  • अगर कोई कर्मचारी 8 घंटे के बाद भी 15 मिनट से अधिक काम करता है तो उसे सामान्य दर से दोगुना ओवरटाइम भुगतान मिलेगा। साथ ही नियुक्ति पत्र के साथ हर महीने सैलरी स्लिप देना भी जरूरी हो सकता है।

इन-हैंड सैलरी क्या कम हो जाएगी?

यह सवाल इस वक्त सबसे ज्यादा लोगों के मन में है। नए नियम के मुताबिक किसी भी कर्मचारी की कुल CTC का कम से कम 50 फीसदी हिस्सा बेसिक सैलरी के रूप में गिना जाएगा। बेसिक बढ़ने से PF, ग्रेच्युटी और बोनस में कटौती भी बढ़ेगी, जिससे हर महीने हाथ में आने वाली रकम थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ते वक्त मिलने वाली रकम काफी बड़ी होगी। यानी तात्कालिक नुकसान के बदले दीर्घकालिक फायदा मिलेगा।

और क्या होने जा रहा है बड़ा बदलाव

नए श्रम कानूनों के तहत वेतन, PF और ग्रेच्युटी के नियमों में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। श्रमिकों को एक तय न्यूनतम सुरक्षा की गारंटी दी जाएगी। राज्य सरकार ने नियमों का मसौदा पहले ही जारी कर दिया है और सभी संबंधित पक्षों से सुझाव व आपत्तियाँ मँगाई जा चुकी हैं। इन्हीं के आधार पर मई में अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएँगे।

छंटनी या ताला लगने पर कड़े किए गए नियम

नई वेतन संहिता में पहली बार हर क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य किया गया है। केंद्र सरकार एक फ्लोर वेज तय करेगी, जिसके नीचे कोई भी राज्य न्यूनतम वेतन नहीं रख सकेगा। हर महीने की 7 तारीख तक वेतन देना जरूरी होगा और ओवरटाइम पर दोगुना भुगतान करना अनिवार्य होगा। लिंग, जाति या धर्म के आधार पर वेतन में भेदभाव पूरी तरह खत्म किया जाएगा। अगर किसी कर्मचारी की छंटनी होती है तो कंपनी को री-स्किलिंग फंड में उसके 15 दिन के वेतन के बराबर रकम जमा करनी होगी। इसके अलावा 300 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को छंटनी या बंदी से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी  बात दें  पहले यह सीमा 100 कर्मचारियों की थी।

होम डिलीवरी करने वालों को भी शामिल किया गया

नई सामाजिक सुरक्षा संहिता में पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म कामगारों को कानूनी दायरे में लाया गया है। जोमैटो, स्विगी जैसे प्लेटफॉर्मों पर काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर भी अब इस सुरक्षा के हकदार होंगे। कंपनियों को अपने सालाना कारोबार का 1 से 2 फीसदी सामाजिक सुरक्षा कोष में जमा करना होगा। काम पर आते-जाते वक्त अगर कोई दुर्घटना होती है तो उसे भी कार्यस्थल से जुड़ी दुर्घटना माना जाएगा। नई व्यवस्था में निरीक्षक अब सिर्फ जाँच नहीं करेंगे बल्कि सुधार में भी मदद करेंगे। छोटी गलतियों पर पहले सुधारने का मौका दिया जाएगा, लेकिन गंभीर उल्लंघन पर 20 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। इन कानूनों से सबसे ज्यादा फायदा छोटे और मझोले उद्योगों यानी MSME सेक्टर को होने की उम्मीद है।

हड़ताल से पहले 14 दिन का पूर्व नोटिस जरूरी

300 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में भी अब नौकरी जाने पर नोटिस और मुआवजा देना जरूरी होगा। कोई भी हड़ताल शुरू करने से पहले 14 दिन का अग्रिम नोटिस देना अनिवार्य किया गया है। 20 से अधिक कर्मचारियों वाले हर संस्थान में शिकायत निवारण समिति बनाना जरूरी होगा ताकि कर्मचारी अपनी समस्याएँ वहाँ रख सकें। इसके अलावा महिलाओं को अब रात की शिफ्ट सहित सभी पालियों में काम करने की अनुमति दी गई है।