8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर 3.83 और पुरानी पेंशन बहाली पर जोर, NC-JCM ने रखीं 15 बड़ी मांगें

Published on: May 1, 2026
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8th Pay Commission : अगर आप सरकारी नौकरी करते हैं या किसी सरकारी कर्मचारी के परिवार से हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत जरूरी है। 8वें वेतन आयोग की दूसरी बैठक 28 से 30 अप्रैल 2026 के बीच नई दिल्ली में हुई। इस बैठक में NC-JCM यानी नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी की स्टाफ साइड ने कर्मचारियों की तरफ से 15 बड़ी मांगें रखीं। इन मांगों में सबसे अहम हैं और सबसे महत्वपूर्ण भी है फिटमेंट फैक्टर 3.83, न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये, पुरानी पेंशन की वापसी और 600 दिनों तक अर्जित अवकाश का नकदीकरण। इसके अलावा, 8वें वेतन आयोग ने हितधारकों से सुझाव लेने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी है। सरकारी कर्मचारी निर्धारित तिथि तक अब अपना ओपिनियन भेज सकते हैं।

NC-JCM ने 8वें वेतन आयोग के सामने रखी 15 प्रमुख मांगें

28 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में NC-JCM स्टाफ साइड की स्थायी समिति ने 8वें वेतन आयोग के सामने अपनी मांगों का पूरा ब्यौरा पेश किया। इन मांगों में वेतन, भत्ते, पेंशन, छुट्टी, बोनस और बीमा — लगभग हर विषय को शामिल किया गया है। आइए एक-एक करके सभी 15 मांगों को सरल भाषा में समझते हैं।

 

1. न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये करने की मांग

NC-JCM ने मांग रखी है कि केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये प्रति माह होना चाहिए। इस आंकड़े की गणना 5 सदस्यों वाले परिवार को आधार मानकर की गई है, जिसमें माता-पिता भी शामिल हैं। ICMR की सिफारिश के अनुसार प्रतिदिन 3490 किलो-कैलोरी की जरूरत तकनीकी खर्चे और अन्य जरूरी मदें भी इसमें जोड़ी गई हैं।

2. फिटमेंट फैक्टर 3.83

अभी केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये है। NC-JCM ने इसे बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग की है, जो कि मौजूदा वेतन का लगभग 3.833 गुना है। यानी फिटमेंट फैक्टर 3.83 के हिसाब से सभी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी होनी चाहिए। अगर यह मांग मानी जाती है तो लाखों सरकारी कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा।

3. वेतनमानों का विलय

स्टाफ साइड ने प्रस्ताव दिया है कि वेतनमानों की कुल संख्या घटाई जाए। इसमें हर श्रेणी के लिए जरूरी शैक्षिक योग्यता, काम का अनुभव और जिम्मेदारी को ध्यान में रखा जाए। वेतनमानों के विलय से वेतन ढांचा सरल और पारदर्शी बनेगा।

4. वार्षिक वेतन वृद्धि 6 प्रतिशत

NC-JCM की मांग है कि हर कर्मचारी को हर साल उसकी बेसिक सैलरी का 6 प्रतिशत वेतन वृद्धि के रूप में मिलना चाहिए। इससे कर्मचारियों की आय हर साल बढ़ती रहेगी और महंगाई का असर कम होगा।

5. 30 साल में 5 प्रमोशन की गारंटी

कई विभागों में कर्मचारी सालों तक बिना प्रमोशन के एक ही पद पर काम करते रहते हैं। इसी समस्या को देखते हुए स्टाफ साइड ने मांग की है कि 30 साल की सेवा के दौरान हर कर्मचारी को कम से कम 5 प्रमोशन मिलने चाहिए — ठीक वैसे जैसे ग्रुप A अधिकारियों को मिलते हैं। अगर तय समय पर प्रमोशन न मिले तो ACP यानी असुरेड करियर प्रोग्रेशन से इसकी भरपाई होनी चाहिए।

6. प्रमोशन पर दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि

स्टाफ साइड ने मांग की है कि जब भी किसी कर्मचारी को प्रमोशन या MACP मिले, उस समय वेतन निर्धारण में दो अतिरिक्त इंक्रीमेंट का लाभ मिलना चाहिए। इससे प्रमोशन के समय वेतन में अच्छी-खासी बढ़ोतरी होगी।

7. सभी भत्तों में तीन गुना वृद्धि

वेतन आयोग से मांग की गई है कि HRA यानी मकान किराया भत्ता, CEA यानी बच्चों की पढ़ाई भत्ता, जोखिम भत्ता और अन्य सभी भत्तों में तीन गुना बढ़ोतरी की जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि ये सभी भत्ते DA बढ़ने के साथ-साथ खुद भी बढ़ने चाहिए।

8. ब्याज-मुक्त अग्रिम और त्योहार अग्रिम की वापसी

सभी सरकारी अग्रिम (advances) ब्याज-मुक्त होने चाहिए। अगर किसी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु हो जाए तो उसके परिवार को मिलने वाले लाभों से अग्रिम की वसूली नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा त्योहार अग्रिम, प्राकृतिक आपदा अग्रिम और चार पहिया वाहन अग्रिम की सुविधा भी फिर से शुरू करने की मांग रखी गई है।

9. 600 दिनों तक अर्जित अवकाश

अभी सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी अधिकतम 300 दिनों की अर्जित अवकाश (EL) का नकदीकरण करा सकते हैं। NC-JCM ने इसे बढ़ाकर 600 दिन करने की मांग की है। साथ ही सेवाकाल के दौरान भी EL के नकदीकरण की सुविधा मिलनी चाहिए। बाल देखभाल अवकाश, पितृत्व अवकाश, मासिक धर्म अवकाश और माता-पिता की देखभाल के लिए भी विशेष अवकाश की मांग की गई है।

10. CGEGIS कवरेज में बढ़ोतरी

केंद्रीय सरकारी कर्मचारी समूह बीमा योजना यानी CGEGIS के तहत बीमा कवरेज बढ़ाने और अंशदान दर को संशोधित करने की मांग रखी गई है, ताकि कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा मिल सके।

11. ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर 2 करोड़ रुपये मिले

अगर कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान आकस्मिक दुर्घटना में अपनी जान गंवाता है, तो उसके परिवार को मिलने वाली अनुग्रह राशि बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये करने की मांग की गई है। यह एक बड़ी और जरूरी मांग है। अगर कर्मचारियों कीजिए मांग मांगी जाती है तो ड्यूटी के दौरान होने वाली मृत्यु से परिवार को एक बड़ी राहत मिलेगी।

12. अनुकंपा नियुक्ति में 5 प्रतिशत की सीमा खत्म हो

अभी अनुकंपा नियुक्ति पर 5 प्रतिशत की ऊपरी सीमा लगाई गई है। NC-JCM ने मांग की है कि यह सीमा हटाई जाए और जरूरतमंद परिवारों को 100 प्रतिशत कवरेज मिलनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र परिवार को नौकरी से वंचित न रहना पड़े।

13. बोनस की सीमा हटाई जाए

मांग रखी गई है कि बोनस की मौजूदा सीमा खत्म की जाए और बोनस की गणना असली बेसिक सैलरी और DA को मिलाकर की जाए। इससे कर्मचारियों को उनके वास्तविक वेतन के अनुसार बोनस मिलेगा।

14. पुरानी पेंशन बहाल करो

यह मांग काफी समय से चली आ रही है। NC-JCM ने साफ तौर पर कहा है कि NPS यानी नई पेंशन योजना और UPS यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम को वापस लिया जाए और पुरानी पेंशन योजना — जो बिना किसी अंशदान के मिलती थी — उसे फिर से शुरू किया जाए। पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा एक बड़ा मुद्दा है जो कि कर्मचारियों के लिए काफी लंबे समय से बना हुआ है अब कर्मचारी आर्ट में वेतन आयोग में इसे शामिल करने की प्रमुखता से मांग तक रहे हैं।

15. मौजूदा पेंशनभोगियों के लिए भी हो इंसाफ

NC-JCM ने जोर देकर कहा है कि 8वां वेतन आयोग उन पेंशनभोगियों को नजरअंदाज नहीं कर सकता जिन्होंने 30 से 40 साल देश की सेवा की है। उनकी पेंशन में संशोधन होना चाहिए। असैनिक कर्मचारियों के लिए भी “एक रैंक एक पेंशन” की व्यवस्था की सिफारिश की जाए। इसके अलावा 11 साल बाद कम्यूटेड पेंशन की बहाली, हर 5 साल पर पेंशन में बढ़ोतरी और ग्रेच्युटी में सुधार की मांगें भी रखी गई हैं।

सुझाव देने की आखिरी तारीख बढ़कर 31 मई हुई

वैसे देखा जाए तो 8वें वेतन आयोग ने 29 अप्रैल को अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर हितधारकों से सुझाव लेने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल से बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दी है। इसकी वजह यह थी कि पुरानी समय सीमा के चलते आयोग की वेबसाइट कुछ समय के लिए बंद हो गई थी। अब सभी हितधारक 31 मई तक अपने सुझाव जमा कर सकते हैं। जो भी केंद्रीय कर्मचारी या पेंशनभोगी अपनी बात वेतन आयोग तक पहुंचाना चाहते हैं, वे इस मौके का फायदा उठा सकते हैं। हो सकता है आयोग द्वारा आपके किसी सुझाव को मान लिया जाए जिससे लाखों कर्मचारियों को लाभ हो सकता है इसलिए आयोग द्वारा कर्मचारियों को और मौका दिया गया है जिससे कर्मचारी अपना सुझाव गंभीरता के साथ दे सकें।

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