UPNL Outsourcing Employees News: उत्तराखंड में लंबे समय से समान काम के बदले समान वेतन की मांग कर रहे उपनल के करीब साढ़े 13 हजार अस्थायी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। राज्य सरकार ने सैनिक कल्याण विभाग के जरिए इस संबंध में संशोधित आदेश जारी कर दिया है, जिससे इन कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन देने का रास्ता साफ हो गया है। पिछली कैबिनेट बैठक में कट ऑफ तारीख में बदलाव को मंजूरी दी गई थी और अब उसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे उन कर्मचारियों को फायदा मिलेगा जो वर्षों से कम वेतन पर अलग-अलग विभागों में काम कर रहे थे और बराबरी की मांग उठा रहे थे।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद बनी स्थिति
यह मामला उत्तराखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुआ था, जिसमें राज्य सरकार को समान काम करने वाले उपनल कर्मचारियों को समान वेतन देने का निर्देश दिया गया था। सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन वहां भी हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया। इसके बाद राज्य सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर समान कार्य के बदले समान वेतन लागू करने का फैसला लिया। करीब दस साल से इस मांग को लेकर कर्मचारी अलग-अलग स्तर पर आवाज उठा रहे थे और अब उन्हें इसका सीधा लाभ मिलने जा रहा है।
12 नवंबर 2018 तक नियुक्त कर्मचारियों को लाभ
सरकार की ओर से जारी नए आदेश के मुताबिक 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त किए गए उपनल कर्मचारियों को इस फैसले का लाभ दिया जाएगा। पहले 25 अप्रैल 2015 तक दस साल की सेवा पूरी करने की शर्त रखी गई थी, लेकिन अब कट ऑफ में बदलाव कर दिया गया है। वित्त विभाग की सहमति के बाद सैनिक कल्याण विभाग ने संशोधित आदेश जारी कर दिया है। अब इन कर्मचारियों को धीरे-धीरे संबंधित विभागों के अधीन माना जाएगा और आउटसोर्स व्यवस्था से अलग किया जाएगा। अभी तक इन्हें आउटसोर्स कर्मचारी की तरह रखा गया था और औसतन 19 से 20 हजार रुपये महीना वेतन मिल रहा था, जबकि नए आदेश के बाद वेतन बढ़कर करीब 41 हजार रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकता है, जो संबंधित पद के अनुसार तय होगा।
चरणबद्ध तरीके से लागू होगी प्रक्रिया
सरकार ने इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला किया है। पहले चरण में 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को लाभ दिया जाएगा। दूसरे चरण में 1 जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 तक नियुक्त कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। 2018 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विभागों को अलग से गाइडलाइन जारी की जाएगी ताकि वे पात्र कर्मचारियों का रिकॉर्ड तैयार कर सकें और वेतन संशोधन की प्रक्रिया पूरी कर सकें।
2018 के आदेश से जुड़ा पुराना मामला
यह मामला वर्ष 2018 के उस आदेश से जुड़ा है, जब उत्तराखंड हाई कोर्ट ने समान काम कर रहे उपनल कर्मचारियों के वेतन और नियमितीकरण पर सरकार से विचार करने को कहा था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और लंबे समय तक सुनवाई चली। आखिरकार तीन फरवरी 2026 को शासन स्तर पर समान कार्य के बदले समान वेतन देने का आदेश जारी किया गया। अब संशोधित कट ऑफ तारीख तय होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। हालांकि 2018 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को लेकर संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की ओर से नई नीति बनाने की मांग जारी है, जिस पर सरकार ने अभी कोई अलग फैसला घोषित नहीं किया है।







