TET For Primary Teacher: 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए TET जरूरी नहीं! जाने पूरी अपडेट

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TET For Primary Teacher : शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे बहुत से उम्मीदवारों के बीच लंबे समय से एक सवाल बना हुआ था कि TET जरूरी है या नहीं। खासकर वे लोग जिनकी भर्ती प्रक्रिया साल 2010 से पहले शुरू हुई थी, उनके मन में ज्यादा कन्फ्यूजन था। इसी बीच 5 सितंबर 2013 को जारी एक सरकारी पत्र ने इस पूरे मामले को काफी हद तक साफ कर दिया। यह पत्र उस समय की अतिरिक्त सचिव की तरफ से जारी किया गया था, जिसमें त्रिपुरा में शिक्षकों की भर्ती से जुड़ी स्थिति को समझाया गया है। इसमें साफ बताया गया है कि किन हालात में TET जरूरी है और किन मामलों में इससे छूट मिल सकती है।

23 अगस्त 2010 का नियम क्यों जरूरी है

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी NCTE ने 23 अगस्त 2010 को एक नया नियम लागू किया था। इस नियम में शिक्षकों की भर्ती के लिए कुछ जरूरी योग्यता तय की गई थी। इसमें कहा गया कि कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के लिए D.El.Ed और कक्षा 6 से 8 के लिए B.Ed जरूरी होगा। इसके साथ ही TET पास करना भी जरूरी कर दिया गया। इस नियम का मकसद यह था कि देशभर में एक जैसा स्तर बना रहे और अच्छे शिक्षक चुने जाएं। इसके बाद सभी राज्यों को कहा गया कि वे इसी नियम के अनुसार भर्ती करें।

पैरा 5 में दी गई छूट ने मामला बदल दिया

हालांकि इसी नियम में एक अहम छूट भी दी गई थी, जो बहुत लोगों के लिए राहत बन गई। 2013 के पत्र में इसी बात को साफ किया गया है। इसमें लिखा है कि अगर किसी राज्य ने 23 अगस्त 2010 से पहले ही भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, जैसे कि विज्ञापन निकाल दिया था या चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई थी, तो ऐसे मामलों में TET जरूरी नहीं होगा। त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वहां 2002, 2006 और 2009 में भर्ती के विज्ञापन निकले थे, इसलिए उन भर्तियों में TET की जरूरत नहीं मानी जाएगी। इसका मतलब साफ है कि पुराने विज्ञापन के आधार पर भर्ती होने वाले उम्मीदवारों को TET से छूट मिल सकती है।

2001 के नियम और 2012 में मिली राहत

पत्र में यह भी बताया गया है कि 2010 से पहले की भर्तियों को NCTE के 2001 वाले नियमों के हिसाब से माना जाएगा। उस समय भी कुछ जरूरी योग्यता तय थी, लेकिन TET जरूरी नहीं था। इसके अलावा 18 जून 2012 को सरकार ने त्रिपुरा को कुछ समय के लिए राहत दी थी। इस राहत के तहत 31 मार्च 2015 तक भर्ती में ढील दी गई थी। लेकिन इसके साथ एक शर्त भी रखी गई थी कि जिन शिक्षकों की भर्ती इस छूट में होगी, उन्हें दो साल के अंदर अपनी जरूरी योग्यता पूरी करनी होगी। यानी सरकार ने थोड़ी राहत तो दी, लेकिन साथ में जिम्मेदारी भी तय कर दी।

राज्यों की जिम्मेदारी और पूरी स्थिति

पत्र के आखिरी हिस्से में साफ कहा गया है कि राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे नियमों के अनुसार ही शिक्षकों की भर्ती करें। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि जो शिक्षक छूट के आधार पर भर्ती हुए हैं, वे समय के अंदर अपनी योग्यता पूरी करें। इस पूरे मामले से यह समझ आता है कि TET जरूरी है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि भर्ती प्रक्रिया कब शुरू हुई थी। अगर भर्ती 23 अगस्त 2010 से पहले शुरू हुई है तो TET जरूरी नहीं है, लेकिन उसके बाद की भर्तियों में TET अनिवार्य है। इससे अब उम्मीदवारों के बीच जो कन्फ्यूजन था, वह काफी हद तक दूर हो गया है।