प्राइमरी टीचर्स को मिलेगी टीईटी से छूट या नहीं? TET अनिवार्यता मामले की सुप्रीम कोर्ट में हुई अहम सुनवाई Teacher TET News Today

Published on: May 13, 2026
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Teacher TET News Today: देशभर के लाखों शिक्षक अभ्यर्थियों और कार्यरत शिक्षकों की नजरें इस समय सुप्रीम कोर्ट में चल रहे TET अनिवार्यता मामले पर टिकी हुई हैं। हाल ही में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां करते हुए साफ संकेत दिए कि बिना TET योग्यता के शिक्षक पद पर बने रहना आसान नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करना सरकार और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। शिक्षक बनने के लिए केवल बीएड, बीटीसी या अन्य प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि TET अब न्यूनतम आवश्यक योग्यता का हिस्सा बन चुका है।

कोर्ट की टिप्पणियों के बाद लाखों अभ्यर्थियों में चर्चा तेज हो गई है क्योंकि आने वाला फैसला भविष्य की शिक्षक भर्तियों पर बड़ा असर डाल सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट TET को पूरी तरह अनिवार्य बनाए रखता है तो भविष्य में बिना TET शिक्षक भर्ती की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। यही वजह है कि यह मामला केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर के शिक्षा विभागों और शिक्षक अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Proviso 1 और Proviso 2 पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा NCTE द्वारा जारी किए गए Proviso 1 और Proviso 2 को लेकर हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से इन प्रावधानों को आधार बनाकर राहत देने की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल तकनीकी आधार पर TET अनिवार्यता समाप्त नहीं की जा सकती। बेंच ने कहा कि Proviso में प्रयुक्त “provided” शब्द का अर्थ पहले से कार्यरत शिक्षकों से जुड़ा हुआ है, न कि नई नियुक्तियों से। कोर्ट ने साफ किया कि किसी भी व्यक्ति की नियुक्ति तभी वैध मानी जाएगी जब उसकी सभी आवश्यक योग्यताएं पूरी हों।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि NCTE ने पहले ही शिक्षकों को पर्याप्त समय दिया था ताकि वे TET योग्यता पूरी कर सकें। ऐसे में अब लंबे समय बाद राहत मांगना उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट की इस टिप्पणी को मामले में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह साफ संकेत मिला है कि बिना TET नई नियुक्तियों को लेकर कोर्ट का रुख काफी सख्त है और आने वाले समय में नियमों को और कड़ाई से लागू किया जा सकता है।

अनुच्छेद 21A और RTE Act का कोर्ट ने किया उल्लेख

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21A का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा अब केवल एक सरकारी नीति नहीं बल्कि बच्चों का मौलिक अधिकार है। RTE Act लागू होने के बाद सरकार की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है कि बच्चों को योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं। कोर्ट ने कहा कि यदि बिना आवश्यक योग्यता वाले शिक्षकों को कार्य करने की अनुमति दी जाती है तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा।

बेंच ने यह भी कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण TET को अनिवार्य बनाया गया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिक्षक न्यूनतम शिक्षण क्षमता रखते हों। कोर्ट इस मामले को केवल भर्ती विवाद के रूप में नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े बड़े मुद्दे के रूप में देख रहा है और इसी वजह से सुनवाई के दौरान कई सख्त टिप्पणियां भी देखने को मिलीं।

prospective और retrospective तर्कों को कोर्ट ने ज्यादा महत्व नहीं दिया

सुनवाई में यह तर्क भी रखा गया कि कई नियुक्तियां ऐसे समय में हुई थीं जब TET नियम पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि NCTE ने नियम लागू करने के बाद पर्याप्त समय दिया था ताकि शिक्षक आवश्यक योग्यता प्राप्त कर सकें। बेंच ने “prospective” और “retrospective” जैसे कानूनी तर्कों को ज्यादा महत्व नहीं दिया और कहा कि जब किसी शिक्षक को समय दिया जा चुका था तो बाद में इस आधार पर राहत की उम्मीद करना उचित नहीं है।

कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए कि TET अब शिक्षा व्यवस्था का स्थायी और अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। कोर्ट की इन टिप्पणियों के बाद माना जा रहा है कि भविष्य में बिना TET शिक्षकों को राहत मिलने की संभावना काफी कम हो सकती है। हालांकि अंतिम फैसला अभी आना बाकी है, लेकिन मौजूदा सुनवाई से यह साफ हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले को लेकर बेहद गंभीर रुख अपनाए हुए है।

शिक्षकों को 01 सितंबर 2027 तक मिल सकता है अवसर

सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने 01 सितंबर 2027 की तारीख का भी उल्लेख किया। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि कोर्ट शिक्षकों को TET योग्यता पूरी करने के लिए अंतिम अवसर दे सकता है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन कोर्ट की टिप्पणी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि कोर्ट समय सीमा तय करता है तो हजारों शिक्षकों को तय अवधि के भीतर TET पास करना अनिवार्य हो सकता है।

शिक्षक संगठनों की ओर से समय सीमा बढ़ाने और राहत देने की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद फिलहाल किसी बड़ी राहत की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। अब लाखों अभ्यर्थियों और शिक्षकों की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में कोर्ट का निर्णय शिक्षा व्यवस्था और शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिव्यू पिटीशन की सुनवाई का आदेश सुरक्षित कर लिया गया है जो जल्द ही जारी किया जा सकता है।