मानदेय वृद्धि पर आज कैबिनेट की मुहर, शिक्षामित्रों अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाया गया UP Shiksha Mitra Salary News

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UP Shiksha Mitra Salary News: उत्तर प्रदेश के करीब 1 लाख 43 हजार शिक्षामित्रों के लिए आज का दिन बेहद अहम है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में कैबिनेट की बैठक हुई। इस बैठक में करीब एक दर्जन से ज्यादा प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें सबसे बड़ा और सबसे जरूरी प्रस्ताव शिक्षामित्रों के मानदेय से जुड़ा है। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में काम कर रहे इन शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किए जाने का प्रस्ताव आज कैबिनेट ने पास कर दिया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बढ़ोतरी की घोषणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान खुद की थी। अब कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।

2017 के बाद पहली बार बढ़ेगा मानदेय 1 अप्रैल से मिलेगा फायदा

बता दें कि शिक्षामित्रों का मानदेय साल 2017 के बाद से अब तक नहीं बढ़ा था। यानी करीब 8 साल बाद इन्हें इस बढ़ोतरी का फायदा मिलने जा रहा है। इस दौरान महंगाई बढ़ती रही, लेकिन मानदेय उसी पुरानी दर पर अटका रहा। ऐसे में यह बढ़ोतरी सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है — यह उन लाखों शिक्षामित्रों की जिंदगी में असली राहत लेकर आएगी जो सालों से कम मानदेय में काम करते आए हैं। सरकार की ओर से साफ किया गया है कि बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से लागू माना जाएगा। यानी कैबिनेट की मंजूरी के बाद अप्रैल महीने से ही शिक्षामित्रों को 18 हजार रुपये मिलने शुरू हो जाएंगे।

नियमितीकरण पर हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

मानदेय बढ़ोतरी के साथ-साथ शिक्षामित्रों के नियमितीकरण का मुद्दा भी इन दिनों चर्चा में है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के नियमितीकरण और सहायक अध्यापक के वेतन से जुड़े मामले में अहम आदेश दिया है। न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने देवरिया की निघत फिरदौस की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा को दो महीने के भीतर इस मामले में सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता को तीन हफ्ते के अंदर अपना प्रत्यावेदन देने को कहा गया है।

याची का कहना था कि वह लंबे समय से प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र के तौर पर काम कर रही हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जग्गो बनाम भारत संघ केस और श्रीपाल व अन्य केस का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें नियमित कर सहायक अध्यापक का वेतन दिया जाए। इसके अलावा 4 जून 2025 के केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निर्देश का भी जिक्र किया गया।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि तेज बहादुर मौर्य व 44 अन्य के केस में भी यही मुद्दा उठाया गया था और उसमें कोर्ट के निर्देश पहले से मौजूद हैं। अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा उसी फैसले को देखते हुए इस मामले में अपना निर्णय लें।

शिक्षामित्रों के लिए क्यों जरूरी है यह फैसला

उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षामित्र बरसों से पढ़ाने का काम कर रहे हैं। ये वो लोग हैं जिन्होंने गांव-गांव जाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ा, लेकिन खुद को बेहद कम मानदेय पर काम करना पड़ा। 10 हजार रुपये में आज के जमाने में घर चलाना बेहद मुश्किल था। ऐसे में 18 हजार रुपये का मानदेय इनके लिए एक बड़ी राहत जरूर है।

हालांकि नियमितीकरण की मांग अभी भी बनी हुई है। शिक्षामित्र लंबे समय से यह मांग करते आ रहे हैं कि उन्हें स्थायी सहायक अध्यापक का दर्जा और उसी के अनुसार वेतन दिया जाए। इलाहाबाद हाईकोर्ट का ताजा आदेश इस दिशा में एक कदम जरूर है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। अपर मुख्य सचिव को दो महीने में जो आदेश पारित करना है, वह इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकता है। फिलहाल शिक्षामित्रों और उनके परिवारों की नजर आज की कैबिनेट बैठक पर टिकी है। मानदेय बढ़ोतरी पर मुहर लगते ही यह खबर उन तमाम शिक्षामित्रों तक पहुंचेगी जो सालों से इस फैसले का इंतजार कर रहे थे।